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सागर मंथन मांथी निकळेला 14 रत्नो ना नाम जाणो.

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सामाजिक व धार्मिक आन्दोलन प्रश्न जवाब.

♻सामाजिक व धार्मिक आन्दोलन

🎈● ‘ब्रह्म समाज’ की स्थापना कब हुई— 1828 ई.

🎈● ‘ब्रह्म समाज’ की स्थापना किसके द्वारा और कहाँ की गई— कलकत्ता में, राजा राममोहन राय

🎈● आधुनिक भारत में हिंदू धर्म के सुधार का पहला आंदोलन कौन-सा था— ब्रह्म समाज

🎈● ब्रह्म समाज का विरोधी संगठन कौन-सा था जिसने सती प्रथा व अन्य सुधारों का विरोध किया— धर्म सभा

🎈● धर्म सभा के संस्थापक कौन थे— राधाकांत देव

🎈● सती प्रथा का अंत कब हुआ— 1829 ई.

🎈● सती प्रथा के अंत में सबसे अधिक प्रयास किसका रहा— राजा राममोहन राय

🎈● ‘आर्य समाज’ की स्थापना कब हुई— 1875 ई., मुंबई

🎈● ‘आर्य समाज’ की स्थापना किसने की— स्वामी दयानंद सरस्वती ने

🎈● आर्य समाज किसके विरुद्ध है— धार्मिक अनुष्ठान व मूर्ति पूजा

🎈● 19वीं सदी में भारतीय पुनर्जागरण का पिता किसे माना जाता है— राजा राममोहन राय को

🎈● राजाराम मोहन राय का जन्म कहाँ हुआ— राधानगर, जिला वर्धमान

🎈● स्वामी दयानंद सरस्वती का मूल नाम क्या था— मूलशंकर

🎈● राजा राममोहन राय के इंग्लैंड जाने के बाद ब्रह्म समाज की बागडोर किसने संभाली— रामचंद विधावागीश

🎈● किसके प्रयासों से ब्रह्म समाज की जड़े उत्तर प्रदेश, पंजाब व मद्रास में फैली— केशवचंद्र सेन

🎈● 1815 ई. में कलकत्ता में किसने ‘आत्मीय सभा’ की स्थापना की— राजा राममोहन राय

🎈● राजा राममोहन राय व डेविड हेयर हकिस संस्था से जुड़े थे— हिन्दू कॉलेज

🎈● थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना कब और कहाँ हुई— 1875 ई., न्यूयॉर्क में

🎈● थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना भारत में कब और कहाँ हुई— 1882 ई., अडयार, मद्रास में

🎈● ‘सत्यार्थ प्रकाश’ की रचना किसने की— दयानंद सरस्वती

🎈● ‘वेदों की ओर लोटों’ का नारा किसने दिया— दयानंद सरस्वती

🎈● ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना कब हुई— 1896-97 ई., बैलूर (कलकत्ता)

🎈● ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना किसने की— स्वामी विवेकानंद

🎈● अलीगढ़ आंदोलन किसने चलाया— सर सैय्यद अहमद खाँ

🎈● अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की नींव किसने डाली— सर सैय्यद अहमद खाँ

🎈● ‘युवा बंगाल’ आंदोलन के नेता कौन थे— हेनरी विवियन डेरोजियो

🎈● ‘सत्य शोधक समाज’ की स्थापना किसने थी— ज्योतिबा फूले

🎈● किस धर्म सुधारक की मृत्यु भारत से बाहर हुई— राजा राममोहन राय

🎈● वहाबी आंदोलन का मुख्य केंद्र कहाँ था— पटना

🎈● भारत में दास प्रथा को कब अवैध घोषित किया गया— 1843 ई.

🎈● भारत में अंग्रेजी शिक्षा की व्यवस्था किसके द्वारा की गई— विलियम बैंटिंक द्वारा

🎈● ‘वेदों में संपूर्ण सच्चाई निहित है’ यह कथन किसका है— स्वामी दयानंद सरस्वती

🎈● ‘महाराष्ट्र का सुकरात’ किसे कहा जाता है— महादेव गोविंद रानाडे

🎈● विवेकानंद किस स्थान पर विश्व धर्म सम्मेलन में प्रसिद्ध हुए— शिकागो

🎈● ‘संवाद कौमुदी’ पत्र के संपादक कौन थे— राजा राममोहन राय

🎈● ‘तत्व रंजिनी सभा’, ‘तत्व बोधिनी सभा’ व ‘तत्व बोधीन पत्रिका’ किससे संबंधित हैं— देवेंद्र नाथ टैगोर

🎈● ‘प्रार्थना समाज’ की स्थापना किसकी प्रेरणा के फलस्वरूप हुई— केशवचंद्र सेन

🎈● ‘वामा बोधिनी’ पत्रिका महिलाओं के लिए किसने निकाली— केशवचंद्र सेन

🎈● शारदामणी कौन थी— रामकृष्ण परमहंस की पत्नी

🎈● ‘कूका आंदोलन’ किसने चलाया था— गुरु राम सिंह

🎈● 1956 ई. में कौन-सा धार्मिक कानून पारित हुआ— धार्मिक अयोग्यता कानून

🎈● महाराष्ट्र के किस सुधारक को ‘लोकहितवादी’ कहा जाता है— गोपाल हरि देशमुख

🎈● ब्रह्म समाज किस सिद्धांत पर आधारित है— एकेश्वरवाद

🎈● ‘देव समाज’ की स्थापना किसने की— शिवनारायण अग्निहोत्री

🎈● ‘राधास्वामी सत्संग’ के संस्थापक कौन हैं— शिवदयाल साहब

🎈● फेवियन आंदोलन का प्रस्तावक कौन था— एनी बेसेंट

🎈● 20वीं सदी के आरंभिक दशक में आरंभ होने वाला आंदोलन कौन-सा था— अहरार

🎈● ‘भारत समाज सेवक’ की स्थापना कब और किसके द्वारा की गई— 1905 ई., गोपाल कृष्ण गोखले द्वारा

🎈● सिक्ख गुरुद्वारा अधिनियम कब पारित हुआ— 1925 ई.

🎈● रामकृष्ण परमहंस का मूल नाम क्या था— गदाधर चटोपाध्याय

🎈● डॉ. ऐनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष कब बनी— 1917 ई.

🎈● शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने कब भाग लिया— 1893 ई.

🎈● ‘प्रीसेप्टस ऑफ जीसस’ की रचना किसने की— राजा राममोहन राय ने

🎈● राजा राममोहन राय की फारसी पुस्तक कौन-सी थी जिसका प्रकाशन 1809 में हुआ— तुहफतुह-उल-मुवाहिदीन

🎈● वेदांत कॉलेज की स्थापना किसने की— राजा राममोहन राय ने

🎈● राजा राममोहन राय को किसने ‘युग दूत’ कहा— सुभाष चंद्र बोस ने

🎈● स्वामी दयानंद सरस्वती के विचारों का वर्णन किस पुस्तक में मिलता है— सत्यार्थ प्रकश में

🎈● शुद्धि आंदोलन किसने चलाया— दयानंद सरस्वती ने

🎈● सेंट्रल हिन्दू कॉलेज की स्थापना किसने की— डॉ. ऐनी बेसेंट ने

🎈● ईस्ट इंडिया दैनिक समाचार-पत्र का संपादन किसने किया— डेरोजियो ने

🎈● ‘भारत भारतीयों के लिए है’ यह किसने कहा था— दयानंद सरस्वती ने


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जानिए कहां स्थित हैं प्रमुख 12 ज्योतिर्लिंग

1- सोमनाथ

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का ही नहीं अपितु इस पृथ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह मंदिर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित है। शिवपुराण के अनुसार जब चंद्रमा को दक्ष प्रजापति ने क्षय रोग होने का श्राप दिया था, तब चंद्रमा ने इसी स्थान पर तप कर इस श्राप से मुक्ति पाई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि इस शिवलिंग की स्थापना स्वयं चंद्रदेव ने की थी। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बिगड़ता और बनता रहा है।

2- मल्लिकार्जुन

यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर का महत्व भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है। अनेक धार्मिक शास्त्र इसके धार्मिक और पौराणिक महत्व की व्याख्या करते हैं। कहते हैं कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जहां पर यह ज्योतिर्लिंग है, उस पर्वत पर आकर शिव का पूजन करने से व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होते हैं।

3- महाकालेश्वर

यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली उज्जैन नगरी में स्थित है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता है कि ये एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। यहां प्रतिदिन सुबह की जाने वाली भस्मारती विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाकालेश्वर की पूजा विशेष रूप से आयु वृद्धि और आयु पर आए हुए संकट को टालने के लिए की जाती है। उज्जैन वासी मानते हैं कि भगवान महाकालेश्वर ही उनके राजा हैं और वे ही उज्जैन की रक्षा कर रहे हैं।

4- ओंकारेश्वर

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध शहर इंदौर के समीप स्थित है। जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है और पहाड़ी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊं का आकार बनता है। ऊं शब्द की उत्पति ब्रह्मा के मुख से हुई है। इसलिए किसी भी धार्मिक शास्त्र या वेदों का पाठ ऊं के साथ ही किया जाता है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊं का आकार लिए हुए है, इस कारण इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना जाता है।

5- केदारनाथ

केदारनाथ स्थित ज्योतिर्लिंग भी भगवान शिव के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में आता है। यह उत्तराखंड में स्थित है। बाबा केदारनाथ का मंदिर बद्रीनाथ के मार्ग में स्थित है। केदारनाथ समुद्र तल से 3584 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। केदारनाथ का वर्णन स्कन्द पुराण एवं शिव पुराण में भी मिलता है। यह तीर्थ भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। जिस प्रकार कैलाश का महत्व है उसी प्रकार का महत्व शिव जी ने केदार क्षेत्र को भी दिया है।

6- भीमाशंकर

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पूणे जिले में सह्याद्रि नामक पर्वत पर स्थित है। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के विषय में मान्यता है कि जो भक्त श्रृद्धा से इस मंदिर के प्रतिदिन सुबह सूर्य निकलने के बाद दर्शन करता है, उसके सात जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते हैं।

7- काशी विश्वनाथ

विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह उत्तर प्रदेश के काशी नामक स्थान पर स्थित है। काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है। इसलिए सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है। इस स्थान की मान्यता है, कि प्रलय आने पर भी यह स्थान बना रहेगा। इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेंगे और प्रलय के टल जाने पर काशी को उसके स्थान पर पुन: रख देंगे। 

8- त्र्यंबकेश्वर

यह ज्योतिर्लिंग गोदावरी नदी के करीब महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के सबसे अधिक निकट ब्रह्मागिरि नाम का पर्वत है। इसी पर्वत से गोदावरी नदी शुरूहोती है। भगवान शिव का एक नाम त्र्यंबकेश्वर भी है। कहा जाता है कि भगवान शिव को गौतम ऋषि और गोदावरी नदी के आग्रह पर यहां ज्योतिर्लिंग रूप में रहना पड़ा। 

9- वैद्यनाथ

श्री वैद्यनाथ शिवलिंग का समस्त ज्योतिर्लिंगों की गणना में नौवां स्थान बताया गया है। भगवान श्री वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का मन्दिर जिस स्थान पर अवस्थित है, उसे वैद्यनाथ धाम कहा जाता है। यह स्थान झारखण्ड प्रान्त, पूर्व में बिहार प्रान्त के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में पड़ता है। 

10-नागेश्वर ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग गुजरात के बाहरी क्षेत्र में द्वारिका स्थान में स्थित है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का पूर्ण अर्थ नागों का ईश्वर है। भगवान शिव का एक अन्य नाम नागेश्वर भी है। द्वारका पुरी से भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूरी 17 मील की है। इस ज्योतिर्लिंग की महिमा में कहा गया है कि जो व्यक्ति पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां दर्शनों के लिए आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

11- रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

यह ज्योतिर्लिंग तमिलनाडु राज्य के रामनाथ पुरं नामक स्थान में स्थित है।  भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ यह स्थान हिंदुओं के चार धामों में से एक भी है। इस ज्योतिर्लिंग के विषय में यह मान्यता है, कि इसकी स्थापना स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है। 

12-घृष्णेश्वर मन्दिर

घृष्णेश्वर महादेव का प्रसिद्ध मंदिर महाराष्ट्र के संभाजीनगर के समीप दौलताबाद के पास स्थित है। इसे घृसणेश्वर या घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त करते हैं। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह अंतिम ज्योतिर्लिंग है। बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप स्थित हैं। यहीं पर श्री एकनाथजी गुरु व श्री जनार्दन महाराज की समाधि भी है।

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