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मंगलवार, 19 अप्रैल 2016

रक्त (लोही) विशे जाणवा जेवु.

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💉💉रक्त💉💉

🍒रक्त एक शारीरिक तरल (द्रव) है जो रक्त वाहिनियों के अन्दर विभिन्न अंगों में लगातार बहता रहता है।

🍒रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होने वाला यह गाढ़ा, कुछ चिपचिपा, लाल रंग का द्रव्य, एक जीवित ऊतक है।

🍒रक्त प्लाज़मा और रक्त कणों से मिल कर बनता है।

🍒प्लाज़मा वह निर्जीव तरल माध्यम है जिसमें रक्त कण तैरते रहते हैं।

🍒प्लाज़मा के सहारे ही ये कण सारे शरीर में पहुंच पाते हैं और वह प्लाज़मा ही है जो आंतों से शोषित पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुंचाता है और पाचन क्रिया के बाद बने हानीकारक पदार्थों को उत्सर्जी अंगो तक ले जा कर उन्हें फिर साफ़ होने का मौका देता है।

🍒रक्तकण तीन प्रकार के होते हैं, लाल रक्त कणिका, श्वेत रक्त कणिका और प्लैटलैट्स।

🍒लाल रक्त कणिका श्वसन अंगों से आक्सीजन ले कर सारे शरीर में पहुंचाने का और कार्बन डाईआक्साईड को शरीर से श्वसन अंगों तक ले जाने का काम करता है।

🍒इनकी कमी से रक्ताल्पता (अनिमिया) का रोग हो जाता है।

🍒श्वैत रक्त कणिका हानीकारक तत्वों तथा बिमारी पैदा करने वाले जिवाणुओं से शरीर की रक्षा करते हैं।

🍒प्लेटलेट्स रक्त वाहिनियों की सुरक्षा तथा खून बनाने में सहायक होते हैं।

🍒मनुष्य-शरीर में करीब पाँच लिटर रक्त विद्यमान रहता है।

🍒लाल रक्त कणिका की आयु कुछ दिनों से लेकर 120 दिनों तक की होती है।

🍒इसके बाद इसकी कोशिकाएं तिल्ली में टूटती रहती हैं।

🍒परन्तु इसके साथ-साथ अस्थि मज्जा (बोन मैरो) में इसका उत्पादन भी होता रहता है।

🍒यह बनने और टूटने की क्रिया एक निश्चित अनुपात में होती रहती है, जिससे शरीर में खून की कमी नहीं हो पाती।

🍒मनुष्यों में रक्त ही सबसे आसानी से प्रत्यारोपित किया जा सकता है।

🍒एटीजंस से रक्त को विभिन्न वर्गों में बांटा गया है और रक्तदान करते समय इसी का ध्यान रखा जाता है।

🍒रक्त का प्रमुख कार्य है : ऊतकों को आक्सीजन पहुँचाना, प्रतिरक्षात्मक कार्य, शरीर pH नियंत्रित करना एवं उत्सर्जी पदार्थों को बाहर करना जैसे- यूरिया कार्बन, डाई आक्साइड, लैक्टिक अम्ल आदि।


〰〰〰〰〰〰〰〰 🌷राहुल😉मेक्स🌷 〰〰〰〰〰〰〰〰

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