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मंगलवार, 15 नवंबर 2016

वैज्ञानिक परिभाषाएं

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वैज्ञानिक परिभाषाएं

वेग (Velocity) - किसी पिंड द्वारा इकाई समय में एक निश्चित दिशा में तय की गई दूरी को उस पिंड का वेग कहते है ।

       वेग = विस्थापन/समय
यह एक सदिश राशि है । इसका S.I. मात्रक मीटर/सेकेण्ड होता है ।

तत्व (Element) - तत्व वह शुद्ध पदार्थ है जो किसी भी रासायनिक विधि दो या दो से अधिक भिन्न गुण वाले अवयवों में बांटा नही जा सकता हो ।
जैसे - सोना , चांदी , ऑक्सीजन , ऑर्गन , फ्लोरीन इत्यादि ।

अम्ल (Acid) - अम्ल वह यौगिक है जो स्वाद में खट्टा हो , क्षारक के साथ अभिक्रिया कर लवण तथा जल बनाता हो और जो नीले लिटमस को लाल कर देता है ।
जैसे - गंध का अम्ल , हाइड्रोक्लोरिक अम्ल , नाइट्रिक अम्ल इत्यादि ।

लवण (Salt) - लवण वह यौगिक है जो किसी अम्ल के अणु में विद्यमान हाइड्रोजन के परमाणु या परमाणुओं के धातु या धातु सदृस तत्व समूहों द्वारा आंशिक या पूर्ण विस्थापन के फलस्वरूप बनते है ।
जैसे - सोडियम क्लोराइड , जिन्क सल्फेट , अमोनियम क्लोराइड

विलयन (Solution) - विलयन दो या दो से अधिक पदार्थो का मिश्रण होता है जिसमे विलय और विलायक की आपेक्षिक मात्राएँ एक निश्चित सीमा तक निरन्तर परिवर्तित हो सकती है ।

विलयन के प्रकार -
विलयन को तीन वर्गो में बांटा गया है ।

1. संतृप्त विलयन (Saturated Solution) - किसी निश्चित ताप पर बना वह विलयन जिसमे विलेय पदार्थ की और अधिक मात्रा न घुलायी जा सके उसे संतृप्त विलयन खा जाता है ।

2 . असंतृप्त विलयन (Unsaturated Solution) -किसी निश्चित ताप पर बना वह विलयन जिसमे विलेय पदार्थ की और अधिक मात्रा न घुलाई जा सके उसे असंतृप्त विलयन कहा जाता है ।

3. अतिसंतृप्त विलयन (Super Saturated Solution) - किसी निश्चित ताप और दाब बना वह संतृप्त विलयन जिसमे विलेय की मात्रा विलयन को संतृप्त करने से और अधिक घुली हो , अतिसंतृप्त विलयन कहा जाता है ।

क्षारक (Base) - क्षारक धातुओं या धातुओं के सदृश तत्व समूहो से बने वे यौगिक है जो अम्ल से अभिक्रिया कर लवण तथा जल बनाता है ।
जैसे - सोडियम हाइड्राक्साइड , मैग्नेशियम ऑक्साइड , पोटैशियम हाइड्राक्साइड इत्यादि ।

चाल (Speed) - किसी पिंड द्वारा इकाई समय तय की गई दूरि को उस पिंड का चाल कहते है ।
         चाल = दूरि/समय
 

यौगिक (Compound) - यौगिक वह शुद्ध पदार्थ है जो दो या दो से अधिक तत्वों को एक निश्चित अनुपात में मिलाने पर रासायनिक संयोग के फलस्वरूप बनता है ।
जैसे - जल , सोडियम क्लोराइड , कैल्सियम कार्बोनेट इत्यादि ।

द्रव्य (Matter) - द्रव्य वह है जो स्थान घेरती है , जिसमे कुछ भार हो जिसकी अनुभूति हम अपने ज्ञानेन्द्रियों द्वारा करते है ।
जैसे - हवा , पानी , पत्थर इत्यादि ।

अणु (Molecule) - किसी तत्व व यौगिक का वह सूक्ष्मतम कण जो स्वतन्त्र अवस्था में रहता हो और जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग न लेता हो , अणु कहलाता है ।

परमाणु (Atom) - तत्व का वह सूक्ष्मतम कण जो स्वतन्त्र अवस्था न रहता हो और रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेता हो , परमाणु कहलाता है ।

त्वरण (Acceleration) - किसी पिंड के वेग परिवर्तन की दर को त्वरण कहते है ।

      त्वरण = वेग में परिवर्तन /समय
त्वरण एक सदिश राशि है ।

गति (Motion) - स्थिर वस्तु की अपेक्षा किसी पिंड के समय के साथ स्थान परिवर्तन को गति कहते है ।

विराम (Rest) - स्थिर वस्तु की तुलना में समय के साथ यदि किसी पिंड के स्थान में परिवर्तन न हो तो उसे विराम अवस्था कहते है ।

गति के प्रकार  (Types of Motion) - गति मुख्यतः पांच प्रकार के होते है ।

1. रैखिक गति (Linear Motion) - ऐसी जिसमे वस्तु सदा सरल रेखा या वक्र रेखा पर चलती हो , रैखिक गति कहलाती है ।
जैस - कमान से निकले तीर की गति , ऊपर से गिरती हुई पिंड की गति ।

2 . यादृच्छिक गति (Random Motion) - ऐसी गति जिसमे वस्तु का गतिपथ निश्चित नही होता है , अर्थात अपनी दिशा सदैव बदलती रहती है , यादृच्छिक गति कहलाती है । 
जैसे - पक्षियों की गति , बर्तन में रखे गैस के अणुओं की गति ।

3 . वृत्तीय गति (Circular Motion) - ऐसी गति जिसमे वस्तु सदैव वृत्ताकार पथ चलती रहती है वृत्तीय गति कहलाती है ।
जैसे - पृथ्वी के चारो ओर चन्द्रमा की गति । नाभिक के चारो जोर इलेक्ट्रान की गति ।

4 . दोलन गति (Oscillatory Motion) - ऐसी गति जिसमे वस्तु मध्य स्थिति के गिर्द दोलन करती । दोलन गति कहलाती है ।
जैसे - लोलक की गति , झूले की गति ।

5 . आवर्त गति (Periodic Motion) - ऐसी गति जिसमे वस्तु अपनी गतिपथ को एक निश्चित समय अंतराल के बाद दुहराती है ,आवर्त गति कहलाती है ।
जैसे - सूर्य के चारो ओर पृथ्वी की गति , पृथ्वी के चारो ओर चन्द्रमा की गति ।

कार्य (Work) - जब किसी पिंड पर कोई बल इस प्रकार लगे की पिंड में गति उत्पन्न हो तो उसे कार्य कहा जाता है ।
   कार्य = बल×विस्थापन

शक्ति (Power) - कार्य करने की समय के दर को शक्ति कहते हैं ।
        शक्ति = कार्य/समय

ऊर्जा (Energy) - कार्य करने की झमता को ऊर्जा कहते है ।

दाब (Pressure) - किसी सतह के इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहा जाता है । 
    दाब = बल/क्षेत्रफल

तरंग (Wave) - इलेक्ट्रानो का एक बिंदु से दूसरे तक स्थानांतरण तरंग कहलाता है ।

तरंगदैर्ध्य् (Wave length) - दो अनुक्रमिकश्रृंग अथवा गर्त के बीच की दूरी को तरंगदैर्ध्य् कहते है ।
तरंग का वेग = आवृत्ति×ट्रंगदैर्ध्य्

संवेग (Momentum) - किसी गतिमान पिंड के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को उस पिंड का संवेग कहते है ।
       संवेग = द्रव्यमान×वेग

आवेग (Impulse) - यदि कोई बल किसी वस्तु पर अल्प समय तक कार्य करता है , तो बल और समय के गुणनफल को उस वस्तु का आवेग कहा जाता है ।
    आवेग = बल×समय

बल आघूर्ण (Torque) - किसी बाहरी बल की वह प्रवृत्ति जो किसी पिंड को किसी अक्ष के परितः घुमाने का प्रयास करता है ,बल आघूर्ण कहलाता है। 
     बल आघूर्ण = बल×बलबाहु

आयाम (Amplitude) - किसी कम्पमानित कण के माध्य बिंदु से महत्तम विस्थापन को आयाम कहते है ।

आवर्तकाल (Time Period) -कम्पमानित कण द्वारा एक दोलन पूरा करने में लगे समय को आवर्तकाल कहते है ।

आवृत्ति (Frequency) - एक सेकेण्ड में कम्पमानित कण द्वारा किये गए पूर्ण दोलनों की संख्या को उस कण की आवृत्ति कहते है ।
            आवृत्ति = 1/आवर्तकाल

अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave) - जब माध्यम के कण तरंग गमन की दिशा के लम्बवत दोलन करते है तब ऐसे तरंग को अनुप्रस्थ तरंग कहते है ।

श्रब्यता सीमा (Limit of audibility) - मनुष्य 20Hz से 20000Hz के बीच की ध्वनि तरंग को सुन सकता है।

अवश्रव्य तरंग (Infrasonic waves) - 20 Hz से नीचे की ध्वनि तरंग को अवश्रव्य तरंग कहते है ।

पराश्रव्य तरंग ( Ultrasonic waves) - 20000 Hz से ऊपर की ध्वनि तरंग को पराश्रव्य तरंग कहते है ।

प्रतिध्वनि (Echo) - किसी विस्तृत स्रोत से टकराकर ध्वनि के पुनः सुने जाने को प्रतिध्वनि कहते है ।

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